Bacchon Ki Hindi Kahaniya | कौन बांधे घंटी बिल्ली को

कौन बांधे घंटी बिल्ली को | Bacchon Ki Hindi Kahaniya

Hindi Kahaniya – अनाज के एक गोदाम में बहुत से चूहे रहते थे हंसते – खेलते गोदाम में रखा अनाज खाते चैन से उनकी जिंदगी गुजर रही थी, उन्हें एक डर भी था। और वह डर था उस बिल्ली का जो रोज उस गोदाम में चक्कर लगाती थी। जब भी बिल्ली आती चूहों मे भगदड मच जाती छिपने के लिए। बिल्ली अभी तक दो – चार चूहों पर ही हाथ साफ कर पाई थी। लेकिन चूहों के लिए मुसीबत तो थी ही बिल्ली। इस जानलेवा समस्या से निपटने के लिए चूहों ने एक दिन मीटिंग बुलाई। बहुत से सुझाव आए, लेकिन दम किसी में भी नही था। एक चूहा बोला, “ हमें गोदाम का दरवाजा सदा के लिए बंद कर देना चाहिए ताकि बिल्ली अंदर आ ही न सके।” `यह तो असभंव है। हमें ऐसा अलार्म लगाना चाहिए ,जो बिल्ली के आने की सूचना दे सके और हम चौकस हो जाएं। ‘ एक बुजुर्ग चूहें ने सलाह दी। तभी दूसरे चूहें के दिमाग में विचार कौंद्या ,कितना अच्छा हो यदि बिल्ली के गले में घंटी बांध दी जाऐ। जब भी बिल्ली आएगी घंटी की आवाज सुनकर हम चौकन्ने हो जाएंगे।’ सभी चूहों को यह सुझाव पसंद आया और वे मारे के खुशी नाचने लगे। तभी एक बुढ़ा चूहा बोला, “सुझाव तो अच्छा है,पर यह बात बताओ कि बिल्ली के गले में घंटी बांधेगा कौन?” सभी चूहों को जैसे सांप सूंघ गया कोई कुछ न बोला। कुछ देर बाद एक चूहे ने खामोशी तोड़ी, “और कौन? जिसने यह सुझाव दिया वही बांधेगा घंटी। अभी उस चूहे को घंटी दी ही जा रही थी कि वहां भगदड़ मच गई। बिल्ली आ पहुंची थी गोदाम में। सभी चूहे अपने – अपने बिलों में जा छिपे। घंटी वहीं बाहर पड़ी रह गई।

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गीदड़ और ढोल

Bacchon Ki Hindi Kahani

Bachhon Ki Hindi Kahaniya – एक समय किसी जंगल में गोमय नामक एक गीदड़ रहता था एक दिन भूख से व्याकुल वह भोजन की तलाश में यहां -वहां भटक रहा था धूमते -धूमते गीदड़ एक युद्धक्षेत्र में जा पहुंचा

वहां उसने देखा कि एक बड़ा – सा ढोल एक पेड़ के नीचे पड़ा हैतभी जोर की हवा चली तो पेड़ की एक झुकी हुई शाखा ढोल से आ टकराई और ढम की आवाज उत्पन्न हुई अब गीदड़ ने ढोल के चारों ओर धूमकर उसका मुआयना कियाऔर पंजों से उस पर थाप दी फिर से ढम की आवाज आई गीदड़ ने सोचा कि शायद ढोल के अंदर कोई छोटा जानवर छिपा बैठा है जो उसका आहार बन सकता है 

लेकिन उसे ढोल बेहद मजबूत प्रतीत हुआ गीदड़ की एक परेशानी यह भी थी कि उसने इससे पहले ढोल कभी देखा ही नहीं था तब उसे एक उपाय सूझा और वह दोनों पंजों से ढोल को बजाने लगा ढोल की आवाज पूरे जंगल में गूंज उठीतभी ढोल की आवाज सुनकर एक तेंदुआ वहां आ पंहुचा उसे देख कर गीदड़ बोला महोदय लगता है इस ढोल के भीतर कोई जानवर छिपा बैठा है आपके पंजों के नाखून तो बेहद पैने हैं आप इसे आसानी से फाड़ सकते हैं और ढोल के अंदर बैठे जानवर को अपना आहार बना सकते हैं तेंदुआ भी संयोगवश भूख से व्याकुल था 

सो उसने अपना भारी पंजा ढोल के ऊपर दे मारा जोर की आवाज करता हुआ ढोल फट गया लेकिन उसके भीतर कोई जानवर न था ढोल बिल्कुल खाली था खाली ढोल देखकर तेंदुए को गुस्सा आ गया क्योंकि वह बेहद भूखा था वह गीदड़ से बोला तुमने मेरा समय बरबाद किया है ढोल के अंदर कोई जानवर नहीं निकला अब मैं तुम्हीं को मारकर खाऊंगा कहकर तेंदुए ने जोरदार झपटटा मारा और गीदड़ को मारकर चट कर गया सीख -लालच बुरी बला है – “Bachhon Ki Hindi Kahaniya”