क्रितघ्न यात्री- Hindi Story For Kids

Hindi Story For Kids – एक दिन दो यात्री एक धूल भरे रास्ते पर चले जा रहे थे। उस दिन बेहद गर्मी थी और आस – पास कहीं छाया ऐसी नहीं थी, जंहा वे बैठकर आराम कर सकें। दोनों यात्री चलते चले गए। उनके आगे धूल  रास्ते के आलावा और कुछ नहीं था। आखिरकार अधिकतर रास्ता तय कर चुकने के बाद उन्हें एक पेड़ दिखाई दिया।

Hindi Story For Kids – क्रितघ्न यात्री

वह पेड़ काफी विशाल था, उसकी शाखाये काफी मोटी -मोटी थी और पत्तो से भरी और छाते के तरह फैली हुई थी। पेड़ के नीचे घनी छाया थी। वहां जगह भी इतनी थी की दोनों यात्री आराम से बैठ सकते थे  टाँगे फैलाकर लेट सकते थे। बेचारे यात्री जैसे – तैसे उस पेड़ तक पहुंचे और उसकी ठंडी छाया में बैठ गए।

वे काफी देर तक पेड़ की छाया में बैठे रहे और उन्होंने ठीक से आराम किया। जब उन्हें कुछ चैन मिला तो एक यात्री ने पेड़ की तरफ निगाह उठाई।

पेड़ को काफी देर तक ध्यान देखते रहने के बाद उसने अपने साथी से कहा, “देख रहे हो” इतने बड़े पेड़ पर एक भी फल नहीं लगा है ! उसके साथी ने भी पेड़ को ध्यान से देखा और पाया की सचमुच उस पेड़ की डालियो पर कोई भी फल नहीं लगा हुआ है।

लेकिन उसने जवाब दिया “दोस्त इससे क्या फर्क पड़ता है! मैं तो इस पेड़ का बड़ा आभारी हूँ, जिसने कड़ी जरुरत के समय हमें छाया दी। इसमें फल नहीं लगे हैं तो क्या हुआ !

पहला यात्री उसकी बात से सहमत नहीं हुआ। वह बोला फिर भी ऐसे पेड़ का क्या फायदा जिसमे एक भी फल न लगे हों बिना फल के पेड़ का क्या मतलब ?

वह यात्री जब अपनी बात कह ही रहा था, तभी उस पेड़ की डालियों और पत्तो में जोर की खड़खड़ाहट हुई। वह आवाज़ इतनी तेज़ थी की वह एकदम से दर गया। उसके साथी ने निगाह उठाकर ऊपर देखकर जानने की कोशिश की कि वह आवाज़ कहा से आई है।

लेकि जब तक दोनों यात्री कुछ समझ पाते उसके पहले ही उन्हें किसी की आवाज़ सुनाई दी।

” तो तुम  चाहते हो की मैं तुम्हे छाया के बजाय फल दूँ?”

दोनों यात्री अब काफी दर गए थे, पहला यात्री धीरे से बोला, ” कौन है? कौन बोल रहा है?”

“मैं यही पेड़ बोल रहा हूँ, जिसकी छाया में तुम आराम कर रहे हो। लेकिन तुम संतुस्ट नहीं हो। है न ? तुम्हे और चाहिए, बेवकूफ, कृतघ्न !”

पहला यात्री अब बहुत दर गया था। साथ में वह बहुत लज्जित भी था वह समझ चूका था की पेड़ क्या कहना चल रहा है। वह धीरे से खड़ा हुआ और बोला, “हे महान पेड़! मैं बहुत लज्जित हूँ तुमने जो आराम मुझे दिया, मैं उसकी कीमत नहीं समझ रहा था।

आज के बाद मैं हमेशा दुसरो का उपकार याद रखूंगा और उसका बदला छकाने की कोशिश करूँगा !”

पेड़ अब काफी खुश था। उस यात्री को पेड़ की शिक्षा समझ में आ गई थी। दोनों यात्रियों ने काफी देर तक उसी पेड़ के नीचे आराम किया और उसके बाद अपने रास्ते पर बाढ़ गए।

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Hindi Story For Kids – इस कहानी से शिक्षा : सहायता करने  वालों का हमेशा आभार मानो।

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