लोमड़ी और बकरी की कहानी | New Lomdi Aur Bakri Ki Kahani

Lomdi Aur Bakri Ki Kahani – एक बार  गर्मी की दोपहर में एक लोमड़ी जंगल में घूम रही थी।  सूरज पुरे जोर से चमक रहा था और तेज धूप निकली थी। लोमड़ी को तेज की प्यास लगी। फिर लोमड़ी पेंडो के इर्द – गिर्द घूम -घूमकर और सूँघकर पानी की तलाश करने लगी, और वाह! अंत में उसे पानी से भरा एक गहरा कुंआ दिख गया। पानी को देखकर लोमड़ी बड़ी प्रसन्न हुई और सीधे कुंए में कूद पड़ी।

Lomdi Aur Bakri Ki Kahani – लोमड़ी और बकरी की कहानी (Hindi Story For Kids)

फिर उसने कुंए में भरपेट पानी पिया।  पानी पीने के बाद लोमड़ी ने कुंए से  बहार निकलने का इरादा किया।  वापस चढ़ने के लिए वह रास्ता ढूंढ़ने लगी, लेकिन उसे कोई रास्ता नहीं मिला। अब लोमड़ी बार – बार चढ़ने का प्रयास करने लगी लेकिन हर पर निरास हो जाती। उसने कई बार प्रयास किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

बार – बार आवाज लगाती ” अरे कोई मेरी  मदद करो ! मुझे यंहा से बाहर निकालो !” क्योंकि लोमड़ी को आशा थी की कोई तो उसकी आवाज़ सुनकर उसकी मदद करेगा और उसे बचाएगा। कई घंटे बीत गए लेकि उस कुंए के पास से कोई नहीं गुजरा। जो उसे बचा सके  फिर उदास होकर लोमड़ी सोचने लगी की अब मैं हमेशा यही फंसी  रह जाउंगी।

दिन ढल गया और शाम हो गई।  देखते ही देखते आसमान में अँधेरा छाने लगा।  बेचारी लोमड़ी रात भर ठन्डे पानी में पड़ी रही वह बेहद दरी हुई थी क्योंकि उसे पता नहीं था की वह कब तक यंहा फंसी रहेगी और कब तक उसे कोई कुंए से बहार निकालेगा।

समय बहुत धीरे – धीरे निकल रहा था।  बड़ी मुश्किल से लोमड़ी के लिए सुबह हुई।  “कोई मदद करो मेरी” लोमड़ी फिर से चिल्लाने लगी।  और इस बार उसकी पुकार सुन ली गई।

बड़े भाग्य से, एक बकरी कुंए के पास से गुजर रही थी। उसे लोमड़ी की पुकार सुनाई पड़ी। बकरी बोली। “सुनो लोमड़ी बहन मुझे तुम्हारी पुकार सुनाई दी। क्या मैं  तुम्हारी कोई मदद कर सकती हूँ ?

अब लोमड़ी तो जानती थी की बकरी उसकी कोई मदद नहीं करेगी। उसे यह भी पता था की कुंए से निकल पाना असंभव है। ऐसे में उसने सीधी -साधी बकरी के साथ एक चाल चलने का बिचार किया, ताकि उसकी मदद से वह कुंए से बाहर निकल सके।

धूर्त लोमड़ी बात बनाई “अरे , मैं तो इस ताजे और ठंडे पानी को पीने के लिए इस कुंए में उत्तरी थी। प्यारी बकरी, विश्वाश करो, मैंने इतना मीठा पानी कभी नहीं पिया। तुम भी नीचे आकर यह पानी पियो न!”

नैतिक शिक्षा

Lomdi Aur Bakri Ki Kahani – लोमड़ी और बकरी की कहानी (Hindi Story For Kids)

लोमड़ी की बात सुनकर बकरी बहुत प्रसन्न हुई। बकरी तुरंत कुंए में कूद पड़ी और लोमड़ी के पास पहुँच गई। उसने भी भरपेट पानी पीने के बाद बकरी को भी अहसास हो गया की अब कुंए से बहार निकल पाना असंभव है।

लोमड़ी बहुत चालक थी। उसने बचने का एक तरीका सोचा। लोमड़ी बोली बकरी से  “क्यों न तुम अपने पिछले पैरो पर खड़ी हो जाओ जिससे की मैं तुम्हारे ऊपर चढ़कर कुंए से बहार निकल जाऊँ।  जब मै बहार निकल जाऊँगी, तो मैं तुम्हे भी बाहर खींच लुंगी।

लोमड़ी की बात सुनकर बकरी खुश हो गई और लोमड़ी की बात मान गई। उसे भी लगा की लोमड़ी का बताया तरीका ही बाहर निकलने का सबसे अच्छा रास्ता है। बिना एक पल गंवाए , वह अपने पिछले पैरो पर खड़ी हो गई और उसने अपने अगले पैर दीवार पर टिका दिए लोमड़ी तुरंत उछल कर बकरी की पीठ पर चढ़ गई और कुंए से बाहर निकल आई।

आखिरकार, उसे छुटकारा मिल ही गया! लोमड़ी तो बाहर निकल आई लेकिन अब उसने पलट कर बकरी की ओर देखा तक नहीं और चल दी। बकरी मदद के लिए चिल्लाने लगी। की “लोमड़ी बहन, तुमने मुझे कुंए से बाहर निकालने का वादा किया था!”

चालाक लोमड़ी ने उसे टका – सा जवाब दे दिया “सुनो मेरी दोस्त ” अगर तुम्हे जरा-सी अक्ल होती तो तुम यह देखे बिना कुंए में नहीं कूदती की बाद में तुम उससे बाहर कैसे निकलोगी!” इतना कहकर लोमड़ी अपने घर की ओर चल दी और बेचारी बकरी कुंए में ही फंसी रह गई।

इस कहानी का नैतिक शिक्षा : बिना सोचे समझे कुछ मत करो।

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