सोने के अंडे देने वाली हंसिनी – Sone Ke Ande Dene Wali Hansini Ki Prerak Kahani

सोने के अंडे देने वाली हंसिनी

Sone Ke Ande Dene Wali Hansini – एक बार की बात है। बहुत दूर किसी जगह पर एक गरीब किसान अपनी पत्नी के साथ रहता था। उनके पास केवल एक छोटा – सा खेत था, जिस पर वे दोनों अपने खाने भर के लिए सब्जियाँ उगा पाते थे। एक  दिन किसान की पत्नी ने किसान से कहा, अगर हमें कुछ अंडे मिल जाएँ तो कितना अच्छा हो। काश ! हमारे पास एक हंसिनी होती, तो हमें रोज अंडे मिलते !

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रोज़ Sone Ke Ande Dene Wali Hansini Ki Prerak कहानी हिंदी में।

किसान के पास हंसिनी खरीदने के लिए तो पैसे थे नहीं, लेकिन वह अपनी पत्नी को दुखी नहीं देखना चाहता था। उसने कुछ सब्जियां इक्कठा की और उन्हें बेचने  के लिए बाजार चल दिया।  वह सोच रहा था की सब्जियां बेचने से जो पैसे मिलेंगे, उनसे वह एक हंसिनी खरीद लेगा।

किसान  जब साम को घर लौटा तो अपने साथ एक हंसिनी लिए हुए था।  उसकी पत्नी बहुत प्रसन्न हुई और प्रसन्नता के मारे सारी रात वह सो नहीं सकी। रात भर वह इंतज़ार करती रही की कब सुबह हो और कब हंसिनी उसे पहला अंडा दे।

सुबह हुई तो किसान अंडा लेने हंस के बाड़े में गया। वंहा पर उसे जो दिखाई दिया, उससे वह हैरान रह गया। वंहा पर तो सोने का अंडा पड़ा था।  उसे सोने का अंडा मिल गया किसान तो ख़ुशी के मारे नाचने – गाने लगा। वह बहुत खुश हुआ।  हंसिनी भी जोर – जोर से आवाज़ निकालने लगी। शोर – गुल सुनकर किसान की पत्नी भी बाड़े की तरफ जा पहुंची।

फिर किसान ने अपनी पत्नी से बोला देखो “प्रिये” देखो हंसिनी ने हमें क्या दिया है।  “सोने का अंडा ” किसान की पत्नी आश्चयचकित होकर तालियां बजाने लगी और बोली यह तो जादुई हंसिनी है। अब तो हम जल्द ही धनवान हो जाएंगे।

अगले दिन फिर वही हुआ। फिर तो रोज़ वही होने लगा। हंसिनी हर रोज़ एक सोने का अंडा देने लगी। धीरे -धीरे किसान और उसकी पत्नी धनि होने लगे। जल्दी ही, वह समय भी आ गया, जब किसान और उसकी पत्नी को एक अंडे के लिए पूरा दिन इन्तजार करना भारी पड़ने लगा। वे सब – कुछ तुरंत ही चाहने लगे।

फिर एक दिन पत्नी किसान से बोली इस हंसिनी के अंदर तो बहुत सारे सोने के अंडे होंगे।  क्यों न हम सारे अण्डों को एक ही बार में बाहर निकाल लें ?

“तुम सच कह रही हो प्रिये” किसान बोला और उसने Sone Ke Ande Dene Wali Hansini के पेट से सारे अंडे एक साथ निकालने के लिए हंसिनी का पेट फाड़ डाला।

लेकिन हंसिनी के पेट से एक भी अंडा नहीं निकला, क्योंकि हंसिनी तो रोज़ एक ही अंडा दे पाती थी। अब किसान और उसकी पत्नी उस हंसिनी से हाथ धो बैठे थे, इस बात का अफ़सोस दोनों कर रहे थे की अब उन्हें सोने का एक भी अंडा मिलने वाला नहीं है।

इस कहानी का नैतिक शिक्षा: ज्यादा लालच करने से हमेशा नुक्सान ही होता है।

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